भगवान शांतिनाथ की भव्य प्रतिमा एवं राजा भोज की पावन धरा पर विराजित यह अतिशय क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए शांति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है।
श्रद्धालुगण निम्न समय-सारणी के अनुसार दर्शन, अभिषेक एवं आरती में सम्मिलित हो सकते हैं।
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, शांतिनगर भोजपुर मध्य प्रदेश की पावन बेतवा नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन एवं अतिशयकारी तीर्थ है। यह स्थल परमार वंश के महान प्रतापी सम्राट राजा भोज की नगरी भोजपुर से जुड़ा हुआ है, जहाँ उन्होंने भव्य शिव मंदिर के साथ-साथ जैन धर्म के प्रति भी अपना आदर भाव प्रकट किया था।
क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ विराजमान भगवान शांतिनाथ की 22.5 फीट ऊँची खड्गासन (कायोत्सर्ग) प्रतिमा है, जो अपनी भव्यता एवं शांत मुखमुद्रा के कारण दूर-दूर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
इस क्षेत्र का संबंध महान जैनाचार्य आचार्य मानतुंगाचार्य से भी जोड़ा जाता है, जिन्होंने प्रसिद्ध "भक्तामर स्तोत्र" की रचना की थी। यह क्षेत्र सदियों से जैन श्रद्धालुओं के लिए आस्था, तप एवं साधना का केंद्र रहा है।
ऐतिहासिक विवरण सामान्य परंपरा एवं जनश्रुति पर आधारित हैं। सटीक तिथियों हेतु क्षेत्र प्रबंध समिति से संपर्क करें।
भोजपुर आगमन के दौरान श्रद्धालु भोपाल-रायसेन क्षेत्र के निम्न जैन मंदिरों के भी दर्शन कर सकते हैं।
भोपाल के पुराने शहर में स्थित यह मंदिर स्थानीय जैन समाज का प्रमुख आराधना स्थल है।
औद्योगिक नगरी मंडीदीप में स्थित यह मंदिर क्षेत्रीय समिति से जुड़ा हुआ है।
बेतवा नदी के समीप बसे इस कस्बे का जैन मंदिर भोजपुर आने वाले यात्रियों के मार्ग में पड़ता है।
कृपया यात्रा से पूर्व संबंधित मंदिर समिति से दर्शन-समय की पुष्टि अवश्य करें।
नीचे दी गई सभी छवियाँ प्लेसहोल्डर हैं — कृपया वास्तविक मंदिर फोटो से प्रतिस्थापित करें।
कृपया इन छवियों को क्षेत्र के वास्तविक फोटोग्राफ से बदलें।
आपका प्रत्येक सहयोग क्षेत्र के जीर्णोद्धार, पूजन-सामग्री एवं नित्य अनुष्ठानों में उपयोग होता है।
जिला रायसेन, मध्य प्रदेश — भोपाल से लगभग 28 किलोमीटर दूर, बेतवा नदी के तट पर स्थित।
सड़क मार्ग द्वारा भोपाल एवं रायसेन दोनों ओर से सुगमता से पहुँचा जा सकता है।
Google Maps पर देखें →